पिरान कलियर : लंबी बीमारी के बाद साबिर पाक के सज्जादानशीन का निधन, देश-विदेश के मुरीदों में शोक की लहर

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निजी आयोजन पर बंदिश नहीं है। देशभर में 16 मार्च से आचार संहिता लागू है। उत्तराखंड में प्रथम चरण...


न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, रुड़की
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Wed, 19 May 2021 10:50 AM IST

सार

साबिर पाक परिसर में किया गया सुपुर्द-ए-खाक, देश-विदेश के मुरीदों में शोक की लहर, दरगाह साबिर पाक के 16वें सज्जादानशीन थे हजरत शाह मंसूर एजाज कुद्दूशी साबरी।

16वें सज्जादानशीन हजरत शाह मंसूर एजाज कुद्दूशी साबरी
– फोटो : फाइल फोटो

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विश्व प्रसिद्ध दरगाह हजरत मखदूम अलाउद्दीन अली अहमद साबिर पाक के 16वें सज्जादानशीन हजरत शाह मंसूर एजाज कुद्दूशी साबरी का लंबी बीमारी के बाद देहरादून के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। इसकी सूचना मिलते ही सूफीवाद मानने वाले लोगों में शोक की लहर दौड़ गई। साथ ही देश-विदेश में उनके मुरीद लोगों में शोक व्याप्त है। मंगलवार को बाद नमाज मगरिब उन्हें दरगाह साबिर पाक के परिसर में सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

पिरान कलियर स्थित दरगाह साबिर पाक के सज्जादानशीन शाह मंसूर एजाज साबरी (80) पिछले लगभग 18 वर्षों से पैरालाइसिस से ग्रस्त थे। इसका लगातार उपचार चल रहा था। तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर उन्हें देहरादून के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यहां सोमवार देर रात उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सुनकर क्षेत्र के लोगों और मुरीदों में शोक की लहर दौड़ गई।

मंगलवार को बाद नमाज मगरिब उन्हें दरगाह साबिर पाक के परिसर में सपुर्द-ए-खाक किया गया। इससे पहले परंपराओं के अनुसार नायब सज्जादानशीन शाह अली एजाज साबरी को दरगाह साबिर पाक का 17वां सज्जादानशीन नियुक्त किया गया। इस दौरान हिंदुस्तान की दीगर खानगाहों के सज्जादानशीनों, उनके खानदान और क्षेत्र के मुअज्जिज लोगों ने उनकी दस्तारबंदी की। उन्होंने कोविड गाइडलाइन का हवाला देते हुए भारी संख्या में मुरीदों को फोन कर जनाजे में न आने की अपील की। लिहाजा सीमित संख्या में लोग जनाजे में शामिल हुए।

विदेशों में फैलाई सूफीवाद की धारा

वर्ष 1984 में अपने पिता तत्कालीन सज्जादानशीन शाह एजाज साबरी के निधन के बाद शाह मंसूर एजाज साबरी को दरगाह साबिर पाक का 16वां सज्जादानशीन नियुक्त किया गया था। लगभग 37 वर्षों के कार्यकाल में उन्होंने हिंदुस्तान ही नहीं बल्कि कई विदेशी मुल्कों में जाकर सूफीवाद के प्रसार-प्रचार में अहम भूमिका निभाई। साथ ही दरगाह साबिर की सभी रस्मों को बखूबी अंजाम दिया। शाह मंसूर एजाज साबरी के देश ही नही विदेशों में भी हजारों की संख्या में मुरीद हैं।

विस्तार

विश्व प्रसिद्ध दरगाह हजरत मखदूम अलाउद्दीन अली अहमद साबिर पाक के 16वें सज्जादानशीन हजरत शाह मंसूर एजाज कुद्दूशी साबरी का लंबी बीमारी के बाद देहरादून के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। इसकी सूचना मिलते ही सूफीवाद मानने वाले लोगों में शोक की लहर दौड़ गई। साथ ही देश-विदेश में उनके मुरीद लोगों में शोक व्याप्त है। मंगलवार को बाद नमाज मगरिब उन्हें दरगाह साबिर पाक के परिसर में सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

पिरान कलियर स्थित दरगाह साबिर पाक के सज्जादानशीन शाह मंसूर एजाज साबरी (80) पिछले लगभग 18 वर्षों से पैरालाइसिस से ग्रस्त थे। इसका लगातार उपचार चल रहा था। तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर उन्हें देहरादून के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यहां सोमवार देर रात उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सुनकर क्षेत्र के लोगों और मुरीदों में शोक की लहर दौड़ गई।

मंगलवार को बाद नमाज मगरिब उन्हें दरगाह साबिर पाक के परिसर में सपुर्द-ए-खाक किया गया। इससे पहले परंपराओं के अनुसार नायब सज्जादानशीन शाह अली एजाज साबरी को दरगाह साबिर पाक का 17वां सज्जादानशीन नियुक्त किया गया। इस दौरान हिंदुस्तान की दीगर खानगाहों के सज्जादानशीनों, उनके खानदान और क्षेत्र के मुअज्जिज लोगों ने उनकी दस्तारबंदी की। उन्होंने कोविड गाइडलाइन का हवाला देते हुए भारी संख्या में मुरीदों को फोन कर जनाजे में न आने की अपील की। लिहाजा सीमित संख्या में लोग जनाजे में शामिल हुए।

विदेशों में फैलाई सूफीवाद की धारा

वर्ष 1984 में अपने पिता तत्कालीन सज्जादानशीन शाह एजाज साबरी के निधन के बाद शाह मंसूर एजाज साबरी को दरगाह साबिर पाक का 16वां सज्जादानशीन नियुक्त किया गया था। लगभग 37 वर्षों के कार्यकाल में उन्होंने हिंदुस्तान ही नहीं बल्कि कई विदेशी मुल्कों में जाकर सूफीवाद के प्रसार-प्रचार में अहम भूमिका निभाई। साथ ही दरगाह साबिर की सभी रस्मों को बखूबी अंजाम दिया। शाह मंसूर एजाज साबरी के देश ही नही विदेशों में भी हजारों की संख्या में मुरीद हैं।



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