हड़कंप : लिब्बरहेड़ी पहुंची प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम

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लिब्बरहेड़ी गांव में मात्र 15 दिन में 35 लोगाें की संदिग्ध मौत होने की खबर प्रकाशित होते ही स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन में हड़कंप मच गया। दोनों ही विभाग के अधिकारियों ने गांव में पहुंचकर ग्रामीणों से जानकारी ली। बीमार लोगों के सैंपल भी लिए। प्रशासन ने निवर्तमान ग्राम प्रधान और ग्रामीणों को ज्यादा से ज्यादा लोगों के सैंपल कराने के लिए कहा। गांव पहुंचे एएसडीएम ने निवर्तमान ग्राम प्रधान और अन्य लोगों से जानकारी ली। साथ ही जो लोग टेस्टिंग नहीं करा रहे हैं, उन्हें टेस्टिंग के लिए प्रेरित करने की अपील की।
नारसन ब्लॉक के लिब्बरहेड़ी गांव में एक मई से प्रतिदिन लगातार दो से तीन मौत होने का मामला सामने आया था। 15 दिन में गांव में करीब 35 संदिग्ध मौतें हुई थी। मरने वालों में अधिकतर 25 से 50 साल के आयुवर्ग के लोग शामिल थे। गांव में जाकर पड़ताल में सामने आया था कि इनमें से अधिकतर मौतों के पीछे की वजह संदिग्ध बुखार था। गांव में लगातार हो रही मौतों को लेकर ग्रामीणों में दहशत और प्रशासन के खिलाफ गुस्सा था। गांव की इस समस्या को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव पहुंची।
एएसडीएम पूरण सिंह राणा प्रशासनिक टीम के साथ मौके पर पहुंचे। यहां पहुंचकर उन्होंने निवर्तमान ग्राम प्रधान उमेश कुमार और अन्य ग्रामीणों से गांव के लोगों से जानकारी ली। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग की ने गांव के 85 लोगों की कोरोना की एंटीजन जांच की। जांच में कोई संक्रमित नहीं पाया गया। एएसडीएम पूरण सिंह राणा ने बताया कि गांव में लोगों को सैंपल देने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण सैंपलिंग कराने के लिए तैयार नहीं है। बताया कि जब तक लोग सैंपल नहीं कराएंगे तो उपचार शुरू करने में दिक्कत आती रहेगी।
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गांव में सैनिटाइजेशन का काम शुरू
लिब्बरहेड़ी में रविवार को प्रशासन की टीम गांव पहुंचने की खबर एडीओ पंचायत को लगी तो वह भी गांव में पहुंचे। उन्हें गांव में अभी तक सैनिटाइजेशन नहीं कराने के बारे में पूछा गया। इस पर उन्होंने स्वयं के संक्रमित होने की जानकारी दी। एएसडीएम ने उन्हें तुरंत गांव में सैनिटाइजेशन का काम शुरू करने के निर्देश दिए। इसके बाद उन्होंने गांव में सैनिटाइजेशन का काम शुरू कर दिया। एडीओ पंचायत ब्रह्मपाल सिंह तेजवान ने बताया कि गांव आबादी के अनुसार काफी बड़ा है। इसलिए पूरे गांव को सैनिटाइजेशन करने में दो से तीन दिन का समय लगेगा। पहले उन्होंने उन्होंने गांव के श्मशान घाट और उन घरों की गलियों को सैनिटाइज किया जहां लोगों की मौत हुई है।

लिब्बरहेड़ी गांव में मात्र 15 दिन में 35 लोगाें की संदिग्ध मौत होने की खबर प्रकाशित होते ही स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन में हड़कंप मच गया। दोनों ही विभाग के अधिकारियों ने गांव में पहुंचकर ग्रामीणों से जानकारी ली। बीमार लोगों के सैंपल भी लिए। प्रशासन ने निवर्तमान ग्राम प्रधान और ग्रामीणों को ज्यादा से ज्यादा लोगों के सैंपल कराने के लिए कहा। गांव पहुंचे एएसडीएम ने निवर्तमान ग्राम प्रधान और अन्य लोगों से जानकारी ली। साथ ही जो लोग टेस्टिंग नहीं करा रहे हैं, उन्हें टेस्टिंग के लिए प्रेरित करने की अपील की।

नारसन ब्लॉक के लिब्बरहेड़ी गांव में एक मई से प्रतिदिन लगातार दो से तीन मौत होने का मामला सामने आया था। 15 दिन में गांव में करीब 35 संदिग्ध मौतें हुई थी। मरने वालों में अधिकतर 25 से 50 साल के आयुवर्ग के लोग शामिल थे। गांव में जाकर पड़ताल में सामने आया था कि इनमें से अधिकतर मौतों के पीछे की वजह संदिग्ध बुखार था। गांव में लगातार हो रही मौतों को लेकर ग्रामीणों में दहशत और प्रशासन के खिलाफ गुस्सा था। गांव की इस समस्या को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव पहुंची।

एएसडीएम पूरण सिंह राणा प्रशासनिक टीम के साथ मौके पर पहुंचे। यहां पहुंचकर उन्होंने निवर्तमान ग्राम प्रधान उमेश कुमार और अन्य ग्रामीणों से गांव के लोगों से जानकारी ली। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग की ने गांव के 85 लोगों की कोरोना की एंटीजन जांच की। जांच में कोई संक्रमित नहीं पाया गया। एएसडीएम पूरण सिंह राणा ने बताया कि गांव में लोगों को सैंपल देने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण सैंपलिंग कराने के लिए तैयार नहीं है। बताया कि जब तक लोग सैंपल नहीं कराएंगे तो उपचार शुरू करने में दिक्कत आती रहेगी।

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