रुड़की: ऑक्सीजन खत्म होते-होते अटकी 50 मरीजों की सांसें, अस्पताल प्रबंधन के हाथ पांव फूले

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औद्योगिक क्षेत्र का ड्रेनेज प्लान तीन-चार चरणों में बनेगा

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जबकि अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि महिला वार्ड में व्यक्ति कहने के बाद भी बाहर नहीं जा...

वैक्सीन लगा रहे कर्मचारियों की सेवा को आगे आया सत्संग भवन

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ऑक्सीजन सिलिंडर (प्रतीकात्मक तस्वीर)
– फोटो : iStock

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उत्तराखंड में रुड़की के जिस क्षेत्र में सबसे ज्यादा ऑक्सीजन का उत्पादन हो रहा है, वहीं पर ऑक्सीजन की किल्लत की घटनाएं सामने आने लगी है। रुड़की में विनय विशाल हॉस्पिटल में बृहस्पतिवार को ऑक्सीजन खत्म होने में एकाध घंटे का समय शेष रहा गया था।

इससे वेंटिलेटर पर सांस ले रहे करीब 50 मरीजों की सांसें अटक गई। ऐसे में अस्पताल प्रबंधन के हाथ पांव फूल गए। हालांकि समय रहते ऑक्सीजन पहुंची तो अस्पताल प्रबंधक और मरीजों की जान में जान आई। वहीं शाम के समय फिर ऐसी स्थिति बन गई कि अस्पताल में तीन ही ऑक्सीजन के सिलिंडर शेष रह गए। हालांकि इस बार प्रशासन से वार्ता के बाद किसी तरह अस्पताल को फिर से ऑक्सीजन मुहैया कराई गई।

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रुड़की में विनय विशाल हॉस्पिटल, आरोग्यम हॉस्पिटल और सिविल अस्पताल में कोविड के मरीज भर्ती किए जा रहे हैं। बृहस्पतिवार दोपहर विनय विशाल हॉस्पिटल में ऑक्सीजन खत्म होने लगी और प्लांट से ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं पहुंच पाई। इसके चलते अस्पताल में भर्ती पचास से अधिक मरीजों की जान पर खतरा मंडरा गया। अस्पताल मालिक डॉ. विनय कुमार गुप्ता ने बताया कि उनके अस्पताल को रोजाना 400 सिलिंडर ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है।

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बुधवार की शाम से ही ऑक्सीजन की किल्लत शुरू हो गई थी। बृहस्पतिवार को स्थिति और भी गंभीर हो गई। पूरी ऑक्सीजन खत्म होने में आधा घंटा ही बचा था कि किसी तरह ऑक्सीजन की व्यवस्था की गई और मरीजों को उपचार दिया गया। इसके बाद बृहस्पतिवार की शाम को फिर से मात्र तीन सिलिंडर ऑक्सीजन के शेष रह गए। प्लांट में बात की गई तो पता चला कि आंधी आने के कारण बिजली गुल होने से ऑक्सीजन नहीं बन पा रही है।

इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने प्रशासन के अधिकारियों से वार्ता की। इस पर अधिकारी हरकत में आए और प्लांट प्रबंधन से वार्ता की गई। बिजली सुचारु होने के साथ ही देर रात तक ऑक्सीजन की व्यवस्था की गई। डॉ. विनय कुमार गुप्ता ने बताया कि ऑक्सीजन की आपूर्ति सुचारु नहीं होगी तो नए मरीजों को भर्ती करना संभव नहीं है। ऑक्सीजन की आपूर्ति सुचारु रहती है तो ही नए मरीजों को भर्ती किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अस्पताल में सभी मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है। इस समय एक भी बेड खाली नहीं है। वेटिंग लिस्ट में भी कई मरीज हैं। उधर, सिविल अस्पताल रुड़की में भी बृहस्पतिवार को ऑक्सीजन की कमी हो गई। हालांकि शाम के समय वहां पर ऑक्सीजन की सप्लाई सुचारु हो गई। 

अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी की बाबत जिला उद्योग केंद्र की महाप्रबंधक एवं ऑक्सीजन आपूर्ति की जिला नोडल अधिकारी पल्लवी गुप्ता ने बताया कि बृहस्पतिवार को सप्लाई चेन में कुछ दिक्कत आई थी, लेकिन अब समस्या का समाधान करा दिया गया है। अस्पताल का प्लांट प्रबंधन से टाईअप करा दिया गया है। स्थानीय अस्पतालों को रोजाना की जरूरत के मुताबिक पूरी ऑक्सीजन सप्लाई होगी। अब कोई समस्या नहीं है। 

दून के एक निजी अस्पताल को सप्लाई देने का दबाव
सूत्रों के अनुसार, प्रदेश सरकार की ओर से देहरादून के एक निजी हॉस्पिटल में प्राथमिकता के तहत ऑक्सीजन उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए गए हैं। बताया जा रहा है कि बृहस्पतिवार को भी जिस समय रुड़की के विनय विशाल अस्पताल को ऑक्सीजन सप्लाई की जानी थी, उस समय जानकारी मिली कि एक ट्रक ऑक्सीजन  देहरादून के निजी हॉस्पिटल के लिए भेजी गई थी। इसके चलते विनय विशाल अस्पताल को तुरंत ऑक्सीजन उपलब्ध कराना संभव नहीं था।

मामले में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नमामी बंसल ने बताया कि मंगलौर में जहां से विनय विशाल अस्पताल को ऑक्सीजन सप्लाई हो रही है, वहां का निरीक्षण किया गया। निर्देश दिए गए कि स्थानीय जरूरत को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए। वहीं बाहरी प्रदेशों को ऑक्सीजन सप्लाई पर भी रोक लगवाई गई है। इस संबंध में एसपी देहात प्रमेंद्र डोबाल से वार्ता कर स्थिति पर नजर रखने के लिए कहा गया है।

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उत्तराखंड में रुड़की के जिस क्षेत्र में सबसे ज्यादा ऑक्सीजन का उत्पादन हो रहा है, वहीं पर ऑक्सीजन की किल्लत की घटनाएं सामने आने लगी है। रुड़की में विनय विशाल हॉस्पिटल में बृहस्पतिवार को ऑक्सीजन खत्म होने में एकाध घंटे का समय शेष रहा गया था।

इससे वेंटिलेटर पर सांस ले रहे करीब 50 मरीजों की सांसें अटक गई। ऐसे में अस्पताल प्रबंधन के हाथ पांव फूल गए। हालांकि समय रहते ऑक्सीजन पहुंची तो अस्पताल प्रबंधक और मरीजों की जान में जान आई। वहीं शाम के समय फिर ऐसी स्थिति बन गई कि अस्पताल में तीन ही ऑक्सीजन के सिलिंडर शेष रह गए। हालांकि इस बार प्रशासन से वार्ता के बाद किसी तरह अस्पताल को फिर से ऑक्सीजन मुहैया कराई गई।

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बुधवार की शाम से ही ऑक्सीजन की किल्लत शुरू हो गई थी। बृहस्पतिवार को स्थिति और भी गंभीर हो गई। पूरी ऑक्सीजन खत्म होने में आधा घंटा ही बचा था कि किसी तरह ऑक्सीजन की व्यवस्था की गई और मरीजों को उपचार दिया गया। इसके बाद बृहस्पतिवार की शाम को फिर से मात्र तीन सिलिंडर ऑक्सीजन के शेष रह गए। प्लांट में बात की गई तो पता चला कि आंधी आने के कारण बिजली गुल होने से ऑक्सीजन नहीं बन पा रही है।

इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने प्रशासन के अधिकारियों से वार्ता की। इस पर अधिकारी हरकत में आए और प्लांट प्रबंधन से वार्ता की गई। बिजली सुचारु होने के साथ ही देर रात तक ऑक्सीजन की व्यवस्था की गई। डॉ. विनय कुमार गुप्ता ने बताया कि ऑक्सीजन की आपूर्ति सुचारु नहीं होगी तो नए मरीजों को भर्ती करना संभव नहीं है। ऑक्सीजन की आपूर्ति सुचारु रहती है तो ही नए मरीजों को भर्ती किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अस्पताल में सभी मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है। इस समय एक भी बेड खाली नहीं है। वेटिंग लिस्ट में भी कई मरीज हैं। उधर, सिविल अस्पताल रुड़की में भी बृहस्पतिवार को ऑक्सीजन की कमी हो गई। हालांकि शाम के समय वहां पर ऑक्सीजन की सप्लाई सुचारु हो गई। 


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