ध्वस्त तटबंधों की सालों बाद भी नहीं हुई मरम्मत, फिर से बाढ़ का खतरा

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गंगा नदी किनारे बालावाली से लेकर उत्तर प्रदेश के रामसहायवाला तक सिंचाई विभाग की ओर से बनाया गया तटबंध तीन साल से तीन अलग-अलग जगह से ध्वस्त पड़ा है। इसके चलते हर वर्ष बरसात के मौसम में गंगा नदी में आने वाला बाढ़ का पानी किसानों की फसलें नष्ट कर देता है। सिंचाई विभाग ने तटबंध की मरम्मत के लिए 115 करोड़ का प्रस्ताव बनाकर केंद्र सरकार को भेजा था। गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग पटना की टीम ने तंटबंधों का तीन बार निरीक्षण भी किया, लेकिन बजट को अभी तक हरी झंडी नहीं मिल पाई है।
खानपुर विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन के प्रयासों से कई वर्ष पहले गंगा नदी में बरसात के मौसम में आने वाली बाढ़ के पानी को खानपुर क्षेत्र में आने से रोकने के लिए गंगा नदी किनारे बालावाली से लेकर उत्तर प्रदेश के रामसहायवाला तक लगभग 12 किलोमीटर लंबा तटबंध बनाया था। वर्ष 2017 में गंगा नदी में आई बाढ़ के पानी ने तटबंध को तीन अलग-अलग जगह से लगभग साढ़े तीन किलोमीटर तक ध्वस्त कर दिया था। इससे बाढ़ के पानी ने क्षेत्र की कृषि भूमि में फैलकर भारी तबाही मचाई थी। लगभग तीन वर्ष गुजर जाने के बाद भी सिंचाई विभाग इसकी मरम्मत नहीं करा सका है। इसके चलते मानसून में फिर से बाढ़ और फसलों के नष्ट होने का खतरा बन गया है। सिंचाई विभाग द्वारा केंद्र सरकार को भेजे गए 115 करोड़ रुपये भी स्वीकृत नहीं हो पाए हैं। वहीं सिंचाई विभाग के ईई डीके सिंह का कहना है कि कुछ औपचारिकता पूरी करने के बाद बजट जारी होने की उम्मीद है। बजट जारी होने के बाद तटबंध का पुन: निर्माण और मरम्मत की जाएगी।
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खनन के चलते गंगा की धारा मोड़ रही रुख
खानपुर। कई वर्ष पहले गंगा नदी उत्तर प्रदेश की ओर बहा करती थी, लेकिन धीरे-धीरे खनन माफियाओं ने जब बालावाली से लेकर कलसिया के बीच में जेसीबी ओर पोकलैंड मशीन से गंगा नदी में अवैध खनन करना शुरू किया तो गंगा हर साल अपनी धारा का रुख खानपुर की ओर मोड़ने लगी। इसका नतीजा यह हुआ कि इसी अवैध खनन के चलते गंगा नदी में आने वाली बाढ़ के पानी ने वर्ष 2017 में अवैध खनन के चलते कमजोर हुऐ तटबंध को तीन जगह से ध्वस्त कर दिया।
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तीन साल पहले किए गए वादे नहीं हो पाए पूरे
कैबिनेट मंत्री ने हवाई दौरा करने के बाद की थीं कई घोषणाएं
अश्वनी शर्मा
खानपुर। तीन साल पहले भी सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने लक्सर तहसील क्षेत्र और गंगा नदी के बालावाली घाट का हवाई दौरा किया था और घोषणा की थी कि सिंचाई विभाग तटबंध की सुरक्षा के लिए जो कार्ययोजना बनाएगा, सरकार उसकी पैरवी करके समय रहते केंद्र सरकार से बजट भी दिलाएगी। लगभग तीन साल गुजरने के बाद भी सिंचाई विभाग कार्ययोजना पर केंद्रीय सरकार बजट जारी नहीं करा सकी।
31 अगस्त वर्ष 2018 को प्रदेश के तत्कालीन सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने हेलीकॉप्टर से लक्सर तहसील के बाढ़ग्रस्त क्षेत्र का हवाई सर्वेक्षण किया था। सर्वेक्षण के बाद उन्होंने लक्सर में पत्रकारों से बातचीत कर घोषणा की थी कि गंगा में सिल्ट जमा होने से नदी की तलहटी ऊंची हो गई है, इसलिए बाढ़ रोकने को सफाई जरूरी है। पूर्व में गंगा की सफाई में उत्तर प्रदेश सरकार को कुछ आपत्तियां थी, लेकिन उन्हें संतुष्ट कर दिया गया है। इस बार गंगा को सफाई कर उसकी धारा को पहले वाली जगह पर डायवर्ट किया जाएगा, लेकिन अब तक गंगा की धारा को डायवर्ट नहीं किया जा सका है। हालांकि बालावाली के घाट के पास रीवर ट्रेनिंग का कुछ काम चल रहा है। दूसरी घोषणा के अनुसार सोलानी नदी के पानी के रखरखाव पर योजना तैयार की जानी थी। इसमें से 400 क्यूसेक पानी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के तीर्थस्थल शुक्रताल को दिया जाना था। जबकि बाकी के ओवरफ्लो पानी को गंगा में डाला जाना था। इसके लिए लगभग 30 करोड़ के प्रस्ताव को केंद्रीय सिंचाई मंत्री ने मंजूरी भी देने की बात कही थी, लेकिन अब तक यह योजना भी धरातल पर नहीं उतर पाई है। हालांकि इस बार सिचाई मंत्री के स्थलीय दौरे को लेकर क्षेत्रीय ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस बार दौरा सार्थक सिद्ध होगा। बालावाली के निवर्तमान प्रधान रविपाल सैनी, कलसिया के निवर्तमान प्रधान प्रतिनिधि मुकेश कुमार, प्रमोद शर्मा, ब्रिजेश शर्मा का कहना है कि कैबिनेट मंत्री स्थलीय निरीक्षण पर क्षेत्र में आ रहे हैं। उम्मीद है वह क्षेत्रीय लोगों की समस्याओ का जल्द निराकरण कराएंगे।
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बरसात के दिनों में गंगा में आने वाली बाढ़ से क्षेत्र पर खतरा मंडरा जाता है। मैं कैबिनेट मंत्री से अल्पकालीन योजना के तहत ठोकरों (स्टड) निर्माण के लिए बजट जारी करने का आग्रह करूंगा। इसके साथ ही तटबंध की मरम्मत के लिए मुख्यमंत्री से भी किसी योजना से बजट जारी कराने की मांग करूंगा।
-कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन, विधायक खानपुर।

गंगा नदी किनारे बालावाली से लेकर उत्तर प्रदेश के रामसहायवाला तक सिंचाई विभाग की ओर से बनाया गया तटबंध तीन साल से तीन अलग-अलग जगह से ध्वस्त पड़ा है। इसके चलते हर वर्ष बरसात के मौसम में गंगा नदी में आने वाला बाढ़ का पानी किसानों की फसलें नष्ट कर देता है। सिंचाई विभाग ने तटबंध की मरम्मत के लिए 115 करोड़ का प्रस्ताव बनाकर केंद्र सरकार को भेजा था। गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग पटना की टीम ने तंटबंधों का तीन बार निरीक्षण भी किया, लेकिन बजट को अभी तक हरी झंडी नहीं मिल पाई है।

खानपुर विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन के प्रयासों से कई वर्ष पहले गंगा नदी में बरसात के मौसम में आने वाली बाढ़ के पानी को खानपुर क्षेत्र में आने से रोकने के लिए गंगा नदी किनारे बालावाली से लेकर उत्तर प्रदेश के रामसहायवाला तक लगभग 12 किलोमीटर लंबा तटबंध बनाया था। वर्ष 2017 में गंगा नदी में आई बाढ़ के पानी ने तटबंध को तीन अलग-अलग जगह से लगभग साढ़े तीन किलोमीटर तक ध्वस्त कर दिया था। इससे बाढ़ के पानी ने क्षेत्र की कृषि भूमि में फैलकर भारी तबाही मचाई थी। लगभग तीन वर्ष गुजर जाने के बाद भी सिंचाई विभाग इसकी मरम्मत नहीं करा सका है। इसके चलते मानसून में फिर से बाढ़ और फसलों के नष्ट होने का खतरा बन गया है। सिंचाई विभाग द्वारा केंद्र सरकार को भेजे गए 115 करोड़ रुपये भी स्वीकृत नहीं हो पाए हैं। वहीं सिंचाई विभाग के ईई डीके सिंह का कहना है कि कुछ औपचारिकता पूरी करने के बाद बजट जारी होने की उम्मीद है। बजट जारी होने के बाद तटबंध का पुन: निर्माण और मरम्मत की जाएगी।

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खनन के चलते गंगा की धारा मोड़ रही रुख

खानपुर। कई वर्ष पहले गंगा नदी उत्तर प्रदेश की ओर बहा करती थी, लेकिन धीरे-धीरे खनन माफियाओं ने जब बालावाली से लेकर कलसिया के बीच में जेसीबी ओर पोकलैंड मशीन से गंगा नदी में अवैध खनन करना शुरू किया तो गंगा हर साल अपनी धारा का रुख खानपुर की ओर मोड़ने लगी। इसका नतीजा यह हुआ कि इसी अवैध खनन के चलते गंगा नदी में आने वाली बाढ़ के पानी ने वर्ष 2017 में अवैध खनन के चलते कमजोर हुऐ तटबंध को तीन जगह से ध्वस्त कर दिया।

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तीन साल पहले किए गए वादे नहीं हो पाए पूरे

कैबिनेट मंत्री ने हवाई दौरा करने के बाद की थीं कई घोषणाएं

अश्वनी शर्मा

खानपुर। तीन साल पहले भी सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने लक्सर तहसील क्षेत्र और गंगा नदी के बालावाली घाट का हवाई दौरा किया था और घोषणा की थी कि सिंचाई विभाग तटबंध की सुरक्षा के लिए जो कार्ययोजना बनाएगा, सरकार उसकी पैरवी करके समय रहते केंद्र सरकार से बजट भी दिलाएगी। लगभग तीन साल गुजरने के बाद भी सिंचाई विभाग कार्ययोजना पर केंद्रीय सरकार बजट जारी नहीं करा सकी।

31 अगस्त वर्ष 2018 को प्रदेश के तत्कालीन सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने हेलीकॉप्टर से लक्सर तहसील के बाढ़ग्रस्त क्षेत्र का हवाई सर्वेक्षण किया था। सर्वेक्षण के बाद उन्होंने लक्सर में पत्रकारों से बातचीत कर घोषणा की थी कि गंगा में सिल्ट जमा होने से नदी की तलहटी ऊंची हो गई है, इसलिए बाढ़ रोकने को सफाई जरूरी है। पूर्व में गंगा की सफाई में उत्तर प्रदेश सरकार को कुछ आपत्तियां थी, लेकिन उन्हें संतुष्ट कर दिया गया है। इस बार गंगा को सफाई कर उसकी धारा को पहले वाली जगह पर डायवर्ट किया जाएगा, लेकिन अब तक गंगा की धारा को डायवर्ट नहीं किया जा सका है। हालांकि बालावाली के घाट के पास रीवर ट्रेनिंग का कुछ काम चल रहा है। दूसरी घोषणा के अनुसार सोलानी नदी के पानी के रखरखाव पर योजना तैयार की जानी थी। इसमें से 400 क्यूसेक पानी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के तीर्थस्थल शुक्रताल को दिया जाना था। जबकि बाकी के ओवरफ्लो पानी को गंगा में डाला जाना था। इसके लिए लगभग 30 करोड़ के प्रस्ताव को केंद्रीय सिंचाई मंत्री ने मंजूरी भी देने की बात कही थी, लेकिन अब तक यह योजना भी धरातल पर नहीं उतर पाई है। हालांकि इस बार सिचाई मंत्री के स्थलीय दौरे को लेकर क्षेत्रीय ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस बार दौरा सार्थक सिद्ध होगा। बालावाली के निवर्तमान प्रधान रविपाल सैनी, कलसिया के निवर्तमान प्रधान प्रतिनिधि मुकेश कुमार, प्रमोद शर्मा, ब्रिजेश शर्मा का कहना है कि कैबिनेट मंत्री स्थलीय निरीक्षण पर क्षेत्र में आ रहे हैं। उम्मीद है वह क्षेत्रीय लोगों की समस्याओ का जल्द निराकरण कराएंगे।

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बरसात के दिनों में गंगा में आने वाली बाढ़ से क्षेत्र पर खतरा मंडरा जाता है। मैं कैबिनेट मंत्री से अल्पकालीन योजना के तहत ठोकरों (स्टड) निर्माण के लिए बजट जारी करने का आग्रह करूंगा। इसके साथ ही तटबंध की मरम्मत के लिए मुख्यमंत्री से भी किसी योजना से बजट जारी कराने की मांग करूंगा।

-कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन, विधायक खानपुर।



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