इस बार गजकेसरी योग में भाई को राखी बांधेंगी बहनें

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रुड़की। आगामी 22 अगस्त को रक्षाबंधन के त्योहार पर बहनें इस बार गजकेसरी योग में अपने भाई को राखी बांधेंगी। खास बात यह है कि इस बार धनिष्ठा नक्षत्र और शोभन योग भी रहने से त्योहार कुछ खास हो जाएगा। त्योहार भद्रा से मुक्त रहने के चलते बहनें दिनभर में किसी भी समय भाई को राखी बांध सकती हैं।
भाई-बहन के प्यार का प्रतीक रक्षाबंधन त्योहार इस बार 22 अगस्त को है। इस बार रक्षाबंधन पर सैकड़ों साल बाद गजकेसरी योग बन रहा है। श्री सरस्वती मंदिर के आचार्य राकेश कुमार शुक्ल ने बताया कि इस बार रक्षाबंधन का त्योहार भद्रा से मुक्त रहेगा। ऐसे में बहनें पूरा दिन भाइयों के हाथ में राखी बांध सकती हैं। वहीं इस बार गुरु और चंद्रमा की युति से गजकेसरी योग बन रहा है। इस योग में सुख की प्राप्ति होती है। राखी बांधने के बाद बहन अपने भाई के लिए जो मन्नत मांगती हैं, वह पूरी जरूर होती है। उन्होंने बताया कि जब किसी की कुंडली में चंद्रमा और गुरु एक दूसरे की तरफ दृष्टि कर बैठते हैं तो गजकेसरी योग बनता है। बताया कि इस बार पूर्णिमा तिथि 21 अगस्त शाम सात बजे से शुरू होकर अगले दिन शाम साढ़े पांच बजे तक रहेगी। ऐसे में बहनें दिनभर अपने भाई को राखी बांध सकती हैं।

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भाई-बहन के प्यार का प्रतीक रक्षाबंधन त्योहार इस बार 22 अगस्त को है। इस बार रक्षाबंधन पर सैकड़ों साल बाद गजकेसरी योग बन रहा है। श्री सरस्वती मंदिर के आचार्य राकेश कुमार शुक्ल ने बताया कि इस बार रक्षाबंधन का त्योहार भद्रा से मुक्त रहेगा। ऐसे में बहनें पूरा दिन भाइयों के हाथ में राखी बांध सकती हैं। वहीं इस बार गुरु और चंद्रमा की युति से गजकेसरी योग बन रहा है। इस योग में सुख की प्राप्ति होती है। राखी बांधने के बाद बहन अपने भाई के लिए जो मन्नत मांगती हैं, वह पूरी जरूर होती है। उन्होंने बताया कि जब किसी की कुंडली में चंद्रमा और गुरु एक दूसरे की तरफ दृष्टि कर बैठते हैं तो गजकेसरी योग बनता है। बताया कि इस बार पूर्णिमा तिथि 21 अगस्त शाम सात बजे से शुरू होकर अगले दिन शाम साढ़े पांच बजे तक रहेगी। ऐसे में बहनें दिनभर अपने भाई को राखी बांध सकती हैं।



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