रुड़की नगर निगम के चुनाव सभी दलों के लिए खास, विधानसभा चुनाव की दृष्टि से प्रत्याशियों के लिए भी यह मजबूत आधार बनाने का अवसर

रुड़की । नगर निगम के चुनाव कई मायनों में महत्वपूर्ण हैं। ये न केवल प्रदेश की त्रिवेंद्र सरकार के कामकाज और इकबाल की परीक्षा होगी बल्कि रामपुर और पाडली को नगर निगम से बाहर निकाले जाने जैसे फैसलों का लिटमस टेस्ट भी होगा। साथ ही यह तय होगा कि सोशल मीडिया पर धमाचौकड़ी मचाने वाला विपक्ष जमीन पर कितना वजूद रखता है। जीएसटी जैसे दूरगामी परिणाम वाले निर्णयों के चलते भाजपा के प्रति जनता की नाराजगी की आंच पर विपक्ष की सियासी हांडी को कितना ताप मिला, इसकी भी पैमाइश होगी। लिहाजा यह चुनाव केवल सत्तारूढ़ दल के लिए ही नहीं अपितु विपक्ष के लिए भी काफी मायने रखने वाले हैं। कह सकते हैं कि साल 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में संभावनाओं के प्रवेश द्वार पर दस्तक जैसी होगी नगर निगम चुनाव का परिणाम। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि सत्तारूढ़ भाजपा के लिए यह चुनाव इसलिए भी ज्यादा अहमियत रखते हैं कि अगर चुनाव परिणाम गड़बड़ाया तो 2022 के विधान सभा चुनाव पर इसका प्रभावी असर पड़ेगा क्योंकि भाजपा के बारे में यह अवधारणा है कि शहरी मतदाताओं में पार्टी की पकड़ हमेशा मजबूत रही है। अगर नींव कमजोर होगी तो इमारत के ढहने का खतरा भी लाजमी है। यह चुनाव कितना अहम् है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि किसी नगर निगम चुनाव में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत दूसरी सभा करने जा रहे हैं । जबकि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष का भी रुड़की नगर निगम चुनाव को लेकर कार्यक्रम तय हो चुका है । से चुनावी सभाएं शुरू कर चुके हैं। सभी प्रमुख राजनीतिक दल साल 2022के विधान सभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए इस स्थानीय निकाय के चुनाव पूरे दमखम के साथ सामाजिक, जातिगत समीकरण को साधते हुए बड़ी संजीदगी से लड़ रहे हैं। प्रत्याशियों के चयन में भी छोटे-बड़े पहलुओं का ध्यान रखा गया। बसपा भी अपने चुनाव चिन्ह पर नगर निगम चुनाव लड़ रही है। गत विधानसभा और लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद बसपा के लिए नगर निगम चुनाव बेहद महत्वपूर्ण हो गए हैं। शायद इसीलिये नगर निगम के जरिए ‘कमबैक’ करने की तैयारी कर रही बसपा ने उस पूर्व सांसद को भी टिकट देने से गुरेज नहीं किया है जो विरोधी पार्टी कांग्रेस के बागी हैं। राजनीतिक जानकार बता रहे हैं कि जितने भी प्रत्याशी मेयर का चुनाव लड़ रहे हैं। उनके लिए भी फिलहाल के चुनाव में विधानसभा चुनाव के लिए मजबूत आधार बनाने का अच्छा अवसर है । उनका मानना है कि यशपाल राणा ने इसीलिए अपने भाई को टिकट दिलवाया है । ताकि वह वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव का मजबूत आधार तैयार कर सके। निर्दलीय प्रत्याशी सुभाष सैनी और गौरव गोयल के बारे में भी कुछ ऐसी चर्चा है कि वह अभी तो दमखम के साथ चुनाव लड़ ही रहे हैं। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव पर भी उनकी निगाह है । भाजपा प्रत्याशी मयंक गुप्ता के बारे में भी इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि वह 2022 के विधानसभा चुनाव की तैयारी करेंगे। पूर्व सांसद राजेंद्र बॉडी के बारे में तो पहले से ही कहा जा रहा है कि उनकी निगाह वर्ष 2022 के विधानसभा चुनावों पर है ।इसीलिए वह नगर निगम मेयर का चुनाव पूरी ताकत के साथ लड़ रहे हैं । उनके समर्थकों का भी मानना है कि यदि वह इस चुनाव को जीत जाते हैं तो वर्ष 2022 का विधानसभा चुनाव जीतने में आसानी होगी। उन्हें बसपा का सिंबल भी आसानी से प्राप्त हो जाएगा।

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