नगर निगम चुनाव में वोट का आंकड़ा 50 फीसदी से ऊपर ले जाना चुनौती, विधानसभा और लोकसभा चुनाव में भाजपा ने रुड़की में प्राप्त किया 50 फीसद से अधिक वोट, अभी तक चुनाव को सही तरीके से नहीं लग पा रहे हैं पार्टी के रणनीतिकार

रुड़की । नगर निगम के चुनाव में वोटों का आंकड़ा 50 फीसद से ऊपर ले जाना भाजपा रणनीतिकारों के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है । पर यह आंकड़ा प्राप्त करना नामुमकिन भी नहीं है। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव और वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशियों ने रुड़की में 50 फीसद से अधिक वोट प्राप्त किया। पर तब दोनों चुनाव तरीके से लड़े गए। इसमें कहीं कोई संधि और आश्चर्य की बात नहीं है कि भारतीय जनता पार्टी रुड़की में बहुत मजबूत स्थिति में है। इसीलिए भाजपा हर चुनाव में यहां पर बढ़त हासिल करती रही है लेकिन निकाय चुनाव में भाजपा रणनीति के अभाव में मात खाती रही है। इस बार भी भाजपा के रणनीतिकार अभी तक अचूक रणनीति नहीं बना पाए हैं। जिस कारण भाजपा का चुनाव जितना मजबूत दिखना चाहिए था। उसी स्थिति में अभी तक नहीं आया है । हालांकि कार्यालय उद्घाटन के अवसर पर अन्य प्रत्याशियों के मुकाबले भीड़ काफी अधिक रही। लेकिन भाजपा के रणनीतिकार अभी तक अपने दोस्त और दुश्मन की सही ढंग से पहचान नहीं कर पाए हैं। उनके द्वारा कुछ विद्रोही नेताओं व कार्यकतार्ओं को पार्टी से निष्कासित जरूर किया गया है। लेकिन अभी भी आस्तीन के सांप काफी हैं । जो कि इसी चुनाव में नहीं हर चुनाव में पार्टी को नुकसान पहुंचाते रहे हैं । लेकिन कार्यक्रम हो या सत्ता के लाभ उठाने का मामला सब में यह आगे रहे हैं। चुनाव विश्लेषकों का कहना है कि वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव और वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के ही बहुत सारे कार्यकर्ता अपनी पार्टी प्रत्याशियों के खिलाफ दुष्प्रचार करने में लगे थे । वह अपने प्रत्याशियों के मुकाबले कांग्रेस के प्रत्याशियों को अच्छा बता रहे थे। लेकिन तब रणनीति अचूक थी और प्रत्याशियों के स्तर से अपने निजी टीमें मैदान में उतारी गई थी। नतीजतन वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में प्रदीप बत्रा ने इतना अधिक वोट प्राप्त किया था कि अन्य सभी प्रत्याशियों के वोट जोड़कर भी उनके जितने वोट नहीं हो पाए थे। ऐसे ही भाजपा के लोकसभा प्रत्याशी डॉ रमेश पोखरियाल निशंक को इतने अधिक वोट रुड़की क्षेत्र से मिले थे कि अन्य प्रत्याशियों सभी प्रत्याशियों को जोड़कर भी उनके जितने वोट नहीं हो पाए थे ।यानी कि दोनों चुनाव में भाजपा ने 50 फीसदी का वोटों का आंकड़ा आसानी से प्राप्त किया। अब तो चुनावी माहौल भाजपा के पक्ष में है और सारे समीकरण भी भाजपा के अनुकूल है। रुड़की नगर निगम क्षेत्र में 4 विधानसभा क्षेत्र आ रहे हैं। जिसमें 3 विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के विधायक हैं ।इसके बाद भी यदि यहां पर भाजपा का प्रत्याशी लोकसभा और विधानसभा जितना वोट न प्राप्त कर सके तो इसमें भाजपा रणनीतिकारों की नाकामी ही मानी जाएगी। दरअसल, भाजपा के रणनीतिकार यह मान बैठे हैं कि जो वह कर रहे हैं । वह सब ठीक है। वह अपनी कमजोरियों को इंगित नहीं कर पा रहे हैं ।यदि उन कमजोरियों को वह समय इंगित नहीं कर पाए और उसमें सुधार नहीं किया गया तो नुकसान उठाना पड़ सकता है। हालांकि अभी समय बहुत है चुनाव कई करवट लेगा यह बात तय हो चुकी है कि मुकाबला भाजपा से ही होना है। चाहे कोई से निर्दलीय प्रत्याशी का हो चाहे बहुजन समाज पार्टी का हो या फिर कांग्रेस प्रत्याशी का।

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