बहुकोणीय मुकाबले में भाजपा नहीं खा सकती मात, शिकस्त के लिए है चुनाव त्रिकोणीय होना जरूरी

रुड़की । भाजपा बहुकोणीय मुकाबले में हारने वाली नहीं है। आमने-सामने के चुनाव में भी भाजपा जीत जाएगी। क्योंकि रुड़की नगर निगम के वोटों का जोड़ घटाव कुछ यही रिजल्ट दे रहा है। इसमें साफ हो रहा है कि भाजपा त्रिकोणीय चुनाव में ही मात खा सकती है। वह भी उस प्रत्याशी के हाथों जो कि भाजपा के परंपरागत वोट में अधिक से सेंधमारी कर रहा हो। हालांकि अब रुड़की नगर निगम का स्वरूप बदल गया है। पहले के मुकाबले काफी नया क्षेत्र शामिल हो गया है। लेकिन इस चुनाव के कुछ समीकरण पूर्व के चुनाव जैसे ही हैं। वर्ष 2008 के चुनाव को ही देख लिया जाए तो उसमें प्रदीप बत्रा निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में तभी जीत पाए थे जब चुनाव ने त्रिकोणीय रूप ले लिया था । उन्होंने भाजपा प्रत्याशी अश्वनी कोशिक को तभी हराने में कामयाबी हासिल की थी। जब उनके द्वारा भाजपा के परंपरागत वोट में बहुत अधिक सेंधमारी कर दी थी। कांग्रेस का असंतुष्ट वोटर भी उनके साथ आ गया था । वर्ष 2013 के चुनाव में भी यशपाल राणा भाजपा विद्रोही प्रत्याशी के रूप में तभी जीत पाए थे। जब उन्होंने भाजपा के परंपरागत वोट में जबरदस्त सेंधमारी कर दी थी। साथ ही उनके साथ कांग्रेस का असंतुष्ट वोटर भी जुड़ गया था। यानी कि यह दोनों चुनाव त्रिकोणीय हुए। दोनों ही चुनाव में भाजपा हारी। वह भी अपने विद्रोही प्रत्याशियों के हाथों। इस बार भी भाजपा के विद्रोही प्रत्याशी के साथ ही पार्टी के परंपरागत वोट में सेंधमारी करने वाले एक और निर्दलीय चुनाव मैदान में हैं। अब ऐसी स्थिति में देखना है कि चुनाव फिर कोई नया कोण लेता है या नहीं। यदि चुनाव त्रिकोणीय रहता है तो भाजपा की गाड़ी फंस जाएगी। यदि चुनाव आमने सामने का मोड़ ले गया तो भाजपा आसानी से जीत जाएगी। इसमें चाहे वोटों का ध्रुवीकरण हो या फिर भाजपा परंपरागत वोट की अचानक एकजुटता बनने की संभावना । यदि चुनाव बहुकोणीय होता है। जैसा कि फिलहाल चल रहा है । ऐसे में भारतीय जनता पार्टी बहुत ही आसानी से जीत जाएगी । गैर भाजपा दलों के रणनीतिकार इसी बात को लेकर चिंतित है कि चुनाव को त्रिकोणीय मोड़ कैसे दिया जाए ताकि भारतीय जनता पार्टी पूर्व के दो चुनाव की तरह हार जाए। ऐसे में यह कांग्रेस को छोड़कर अन्य तीन प्रत्याशियों पर निगाह जमाए हुए है । क्योंकि कांग्रेस के चुनाव में सामने आते ही भाजपा के परंपरागत वोट एकजुटता आने में जरा भी देर नहीं लगेगी। क्योंकि तब भाजपा के परंपरागत वोट का राष्ट्रवाद जाग जाएगा। चुनाव विश्लेषक भी मानते हैं कि कांग्रेस यदि सामने आती है तो भाजपा का परंपरागत वोट में तेजी ही नहीं आएगी बल्कि एकजुटता भी बढ़ जाएगी। हां यदि अन्य कोई समीकरण बनता है तो उसमें भाजपा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। तब की स्थिति में स्थानीय मतदाता स्थानीय समीकरणों पर वोट कर सकता है। चुनाव विश्लेषकों का यह भी कहना है कि अब अगले दिनों में नगर निगम मेयर का चुनाव हर दिन नया मोड़ लेगा पर अंतिम में जाकर जो चुनावी कोण बनेगा रिजल्ट उसी पर आएगा।

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