एक दूसरे की वोटों में सेंधमारी से निकलेगा जीत का समीकरण, भाजपा प्रत्याशी को परंपरागत वोट थामने की तो अन्य प्रत्याशियों को वोटों का आंकड़ा अधिक पहुंचाने की चुनौती

रुड़की । नगर निगम मेयर पद पर भाजपा की भाजपा और कांग्रेस की कांग्रेस से सीधी लड़ाई हो रही है। इसीलिए दोनों पार्टियों के परंपरागत वोट में जबरदस्त सेंधमारी हो रही है। दरअसल, भाजपा के प्रत्याशी मयंक गुप्ता का चाहे चुनाव प्रचार हो या वोटों के ग्राफ बढ़ाने की होड़ तो उनका सीधा मुकाबला पार्टी के विद्रोही प्रत्याशी गौरव गोयल से हो रहा है। क्योंकि गौरव गोयल शुरू से ही भाजपा में रहे हैं और मयंक गुप्ता भी इसी पार्टी के सीनियर लीडर हैं । जाहिर है कि दोनों का लगाव भाजपा के परंपरागत वोट से होगा। पर भाजपा अनुशासित और नियमों पर चलने वाली पार्टी है तो भाजपा का अधिकतर परंपरागत वोट मयंक गुप्ता के समर्थन में जाना स्वाभाविक है। लेकिन ऐसा भी नहीं की गौरव गोयल भाजपा के परंपरागत वोट में कोई मामूली सेंधमारी कर रहे। अभी तक की स्थिति में वह भाजपा का काफी वोट प्राप्त कर रहे हैं । उसी के जरिए वह मुकाबले में आ रहे हैं। इसके बाद उन्हें कांग्रेस व बसपा का असंतुष्ट भी प्राप्त कर रहे है । इसीलिए गौरव गोयल भाजपा प्रत्याशी मयंक गुप्ता से सीधी टक्कर ले रहे हैं । अब रही कांग्रेस प्रत्याशी रिशु राणा और बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी राजेंद्र बॉडी की बात। यदि देखा जाए तो राजेंद्र बॉडी भी एक तरह से कांग्रेसी है । क्योंकि वह नामांकन के दिन है कांग्रेस से बगावत कर बहुजन समाज पार्टी में आए हैं। साफ है कि कांग्रेसियों से उनके रिश्ते अभी नए ही है । रिशु राणा पर कांग्रेस का परंपरागत वोट अधिक हो सकता है तो राजेंद्र बॉडी की भी कांग्रेस के परंपरागत वोट में सेंधमारी जरूर रहेगी। वजह, कांग्रेस के असंतुष्ट नेता राजेंद्र बॉड़ी के साथ खड़े हैं। राजेंद्र बॉडी को वह कांग्रेसी चुनाव लड़ा रहे हैं । जिन्होंने वर्ष 2019 का लोकसभा चुनाव अमरीश कुमार को लड़ाया है। अब देखना यह है कि अगले शेष दिनों में भाजपा के परंपरागत वोट में मयंक गुप्ता बढ़त बनाए रखते हैं या फिर गौरव गोयल बड़ी सेंधमारी करते हैं। यहां पर साफ है कि दोनों का चुनाव इसी बात पर निर्भर करेगा कि भाजपा का परंपरागत वोट ज्यादा किसके पक्ष में रहेगा। यदि भाजपा का परंपरागत वोट 70 फीसद तक मयंक गुप्ता के पास रहता है तो उन्हें शिकस्त देना मुश्किल रहेगा और यदि भाजपा का परंपरागत वोट मयंक गुप्ता के पक्ष में घटकर 50 फीसद हो जाता है तो उन्हें बसपा ,निर्दलीय या फिर कांग्रेस प्रत्याशी मुस्लिम वोटों के दम पर सीधे चुनौती दे सकता है। यानी कि ऐसे समीकरणों में जीत हार किसी की भी हो सकती है। यहां पर भी अभी और साफ होनी है बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी राजेंद्र बॉडी पर बसपा का परंपरागत वोट कितना है। यानी कि दलित वोट उनके साथ किस प्रतिशत में है और वह कांग्रेस वह भाजपा के असंतुष्ट नेताओं के जरिए कितना गैर दलित हिंदू मतदाता प्राप्त कर सकते हैं । यदि उनके पास वोट जोड़कर 28000 से अधिक हो जाता है तो वह निश्चित रूप से अल्पसंख्यक समुदाय के वोटों के जरिए भाजपा को हराने की स्थिति में आ सकते हैं। यही कंडीशन कांग्रेस प्रत्याशी रिशु राणा के सामने हैं। यदि वह भाजपा व बसपा के असंतुष्ट नेताओं और अपने दम पर 28000 हिंदू मतदाता प्राप्त कर लेते हैं तो निश्चित रूप से वह अल्पसंख्यक मतदाता के जरिए भाजपा को पटकनी दे सकते हैं। अल्पसंख्यक में कांग्रेस प्रत्याशी को ईसाई मतदाता आसानी से मिल जाएगा जबकि बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी को इसाई मतदाता मिलने में थोड़ी दिक्कत रहेगी। चुनावी से सिर विश्लेषकों का कहना है कि यदि गौरव गोयल दलित व गैर दलित हिंदू को जोड़कर 30000 वोट प्राप्त कर लेता है तो निश्चित रूप से मुस्लिम मतदाता का तेजी से रुझान उनकी ओर बढ़ेगा और वह भाजपा के प्रत्याशी को मैदान में चारों खाने चित करने में कामयाब हो जाएंगे। क्योंकि निर्दलीय होने के नाते अल्पसंख्यक मतदाता में ईसाई और सिख समुदाय का वोट भी उनकी ओर बड़ी ही तेजी के साथ जा सकता है इन तीनों प्रत्याशियों के अलावा निर्दलीय प्रत्याशी सुभाष सैनी यदि दलितों और गैर दलित वोट का आंकड़ा 30000 पर पहुंचा लेते हैं तो निश्चित रूप से वह अल्पसंख्यक वोटों के दम पर भाजपा प्रत्याशी को कड़ी चुनौती देंगे यहां तक कि वह भाजपा प्रत्याशी को हरा भी सकते हैं । सजातीय वोट अधिक होने के कारण उनकी भाजपा में सेंधमारी बड़ी हो सकती है ।कहने का मतलब साफ है कि भाजपा प्रत्याशी यदि पार्टी का 70 फीसदी परंपरागत वोट थामें रहे तो फिर उन्हें कहीं कोई दिक्कत नहीं है। वहीं चारों प्रत्याशी भाजपा के परंपरागत वोट में 40 फीसद तक सेंधमारी करते तो तभी उन्हें सफलता मिल सकती है क्योंकि भाजपा विरोधी वोट फिलहाल यही स्पष्ट करता नजर आ रहा है कि जो भी अधिक वोट का रुझान स्पष्ट करेगा ।वह उसके साथ ही खड़ा हो जाएगा। तो अभी चुनौती पांचो प्रत्याशियों के सामने हैं अब देखना यह है कि वह इस चुनौती पर कैसे पार पाते हैं ।ऐसे संघर्ष में गैर भाजपा प्रत्याशियों में भी एक दूसरे की वोटों में सेंधमारी के लिए जबरदस्त टकराव बनेगा।

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