आचार्य विनोबा भावे जी की 150 वीं जन्म जयंती पर सात दिवसीय यूथ सम्मेलन का आयोजन, स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा एक गांधीवादी तन से, मन से, जीवन से एन सुब्बाराव

ऋषिकेश / नई दिल्ली । आचार्य विनोबा भावे की 150 वीं जन्म जयंती के उपलक्ष्य में गांधी आश्रम किंग्सवे, कैम्प, दिल्ली में सात दिवसीय यूथ सम्मेलन का आयोजन किया। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने सात दिवसीय यूथ सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर युवाओं में लोकप्रिय और प्रख्यात गांधीवादी 91 वर्ष के चिंतक श्री एसएन सुब्बाराव जी, हरिजन सेवक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो डाॅ शंकर सान्याल जी, जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव डाॅ साध्वी भगवती सरस्वती जी और कई गणमान्य अतिथियों ने सहभाग किया। यूथ सम्मेलन में भारत के विभिन्न प्रांतों के विनोबा भावे जी को मानने वाले और सक्रियता से कार्य करने वाले कार्यकर्ता और युवाओं ने सहभाग किया। भूदान आन्दोलन के जनक, अहिंसा और सत्याग्रह के सिपाही आचार्य विनोबा भावे जी की 7 जून 1916 को पहली बार गांधी जी से भेंट हुई और उसके बाद जैसे दोनों एक हो गये और फिर विनोबा जी ने खुद को गांधी जी के आश्रम के लिये समर्पित कर दिया। संत विनोबा भावे जी द्वार 1951 में चलाया गया भूदान आन्दोलन वास्तव में स्वैछिक भूमि सुधार आन्दोलन था।वे जीवन पर्यन्त सामाजिक और रचनात्मक कार्य करते रहे साथ ही वे एक महान स्वतंत्रता सैनानी भी थे। विनोबा भावे जी ने लगभग 50 वर्षों तक वेदों का अध्ययन-मनन कर सार निकाला और कई मंत्रों की आज के परिपेक्ष्य में नई व्याख्या की तथा युगानुरूप सामाजिक और आध्यात्मिक संदेश भी दिए । विनोबा भावे जी ने आदर्श समाज जीवन के तीन सूत्र दिये ’’योग, उद्योग और सहयोग’’ वास्तव में यह आज के परिपेक्ष्य में अमृत वाक्य है। उन्होने अध्यात्म साधना और श्रम सेवा को एक जैसा दर्जा प्रदान किया। उन्होने कहा कि मेरी दृष्टि में कृष्ण अर्थात मेरे किसान मित्र। वेदों का अध्ययन कर उन्होने सर्वधर्म समभाव का संदेश दिया। संस्कृत और वेद विद्या के प्रति उनकी अगाध निष्ठा थी। उनके अनुसार दुनिया के निर्माण में ’’अध्यात्म, विज्ञान और साहित्य’’ का विशेष योगदान है।उन्होने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि मानव सम्यता के भावी विकास के लिये विज्ञान और अध्यात्म को जोड़ना आवश्यक है और दोनों को जोडने की कड़ी साहित्य है। विनोबा भावे जी के जीवन पर बंगला की क्रान्ति और हिमालय की शान्ति का गहरा प्रभाव था। यूथ सम्मेलन को सम्बोधित करते हुये स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि विनोबा भावे जी ने सत्य, प्रेम और करूणा का संदेश दिया।स्वामी जी ने कहा कि कितना थोड़ा समय मिला है जिन्दगी में थोड़ी सी सांस और प्रत्येक सांस में जीवन का एक ही विश्वास हो कि सब अपने है सब अपना परिवार है अतः हम सभी को अपने साथ लेते हुये आगे बढ़े। जीवन से घ्रणा, नफरत, ईर्ष्या और द्वेष के जंजालों से खुद को मुक्त करे और इन दीवारों को तोड़ते हुये, छोटी-छोटी दरारों को भरते हुये अपने जीवन को प्रेममय बना लें। ’’प्रेम जब अनन्त हो गया, रोम-रोम संत हो गया। देवालय हो गया बदन, हृदय तो महंत हो गया।’’ स्वामी जी ने कहा कि हृदय को महंत बनाना है और हृदय महंत तभी बन पाता है जब मैं का हनन हो जाता है। मैं का हनन होना ही तो महंत बनना है। स्वामी जी ने कहा कि जब भी मिलों जिससे भी मिलों दिल खोल कर मिलो न जाने किस गली में जिन्दगी की शाम हो जाये। स्वामी जी ने कहा कि आचार्य विनोबा भावे जी चाहते थे कि लोग जमींदार नहीं बल्कि जमीरदार बने। हमारे वतन के प्रति हमारी वफादारी, रवादारी, जिम्मेदारी और ईमानदारी हो। उन्होने कहा कि हमारे लिये वतन पहले हो और हमारे सारे जतन वतन के लिये ही हो। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने विनोबा भावे जी, गांधी जी और स्वामी विवेकानन्द जी के विचारों पर प्रकाश डालते हुये कहा कि स्वामी विवेकानन्द जी ने शिकागो की धर्म संसद में 1893 में अपना उद्बोधन देकर विश्व के सामने भारत को एक मजबूत छवि प्रदान की थी। उन्होने गर्व से कहा था कि मैं उस धर्म से हूँ जिसने पूरी दुनिया को सहिष्णुता और सार्वभौमिक स्वीकृति का पाठ पढ़ाया है। इस सभा में उन्होने तलवार और कलम दोनों की हठधर्मिता और कट्टरता की बात कही थी। युवाओं में लोकप्रिय, प्रख्यात गांधीवादी चिंतक श्री एसएन सुब्बाराव जी ने अपना पूरा जीवन महात्मा गांधी और विनोबा भावे जी के विचारों के लिये समर्पित कर दिया। उन्होने युवाओं को जोश और होश का अर्थ समझाया। उन्होने अपने जोशीले अन्दाज में युवाओं को सर्वधर्म, सद्भाव, समरसता, एकता, ऊर्जावान बने रहने का संदेश दिया और राष्ट्रभक्ति से प्रेरित उद्बोधन दिया। हरिजन सेवक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो डाॅ शंकर सान्याल जी ने भी ओजस्वी विचारों में गांधी जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुये कहा कि 21 वीं सदी में हम गांधी जी के विचारों को, आदर्शों को और संस्कारों को जी सकते है। इस अवसर पर जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती जी, सुश्री गंगा नन्दिनी त्रिपाठी जी, आचार्य दीपक शर्मा जी और हजारों की संख्या में गांधी जी और विनोबा भावे जी के विचारों को मानने वाले कार्यकर्ता उपस्थित थे।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने वहां उपस्थित सभी कार्यकर्ताओं को एक वर्ष में 125 पौधें रोपित करने का संकल्प कराते हुये कहा कि आचार्य विनोबा भावे जी की 125 वीं जन्म जयंती पर यही सच्ची श्रद्धाजंलि होगी।

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