गंगा से केवल धार्मिक भावनाएं नहीं जुड़ी हैं. विज्ञान भी इस अद्वितीय जल के गुणों के आगे नतमस्तक है, रुड़की शहर विधायक प्रदीप बत्रा ने क्षेत्रवासियों को दी गंगा दशहरा की शुभकामनाएं और बधाई,इस अवसर पर उठाई रुड़की को कुंभ क्षेत्र में शामिल कराए जाने की मांग

 

रुड़की ।   शहर विधायक प्रदीप बत्रा में गंगा दशहरा की सभी को शुभकामनाएं और बधाई दी है। इस अवसर पर उन्होंने रुड़की को कुंभ क्षेत्र में शामिल किए जाने की मांग उठाई है । उन्होंने कहा है कि रुड़की देवभूमि का प्रवेश द्वार है । इसीलिए रुड़की को शामिल न करते हुए जितनी भी विकास संबंधी योजनाएं और यातायात प्लान बनते हैं वह इसीलिए अधूरे रह जाते हैं। क्योंकि रुड़की अभी तक कुल क्षेत्र में शामिल नहीं है। उन्होंने कहा है कि रुड़की कुंभ क्षेत्र में शामिल हो जाएगा तो फिर गंग नहर के घाटों का भी हरिद्वार गंगा घाटों की तरह विस्तार होगा। इससे श्रद्धालुओं को स्नान में सुविधा होगी और यहां के सभी मार्ग भी पर्यटन और चार धाम यात्रा की दृष्टि से विकसित हो सकेंगे। शहर विधायक प्रदीप बत्रा ने कहा है कि आज जो जाम की समस्या उत्पन्न हो रही है उसे पूरी तरह समाप्त करने के लिए गंग नहर कीर राइट और लेफ्ट पटरी को मार्ग का रूप देना चाहिए इसके लिए वह शासन स्तर पर प्रयास करेंगे मुख्यमंत्री, केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री और शहरी विकास मंत्री से इस बाबत विशेष वार्तालाप करेंगे। उन्होंने कहा कि निर्माणाधीन फोरलेन का कार्य जल्द पूरा कराने के लिए वह केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से जल्द मुलाकात करेंगे। शहर विधायक प्रदीप बत्रा ने कहा कि आज गंगा दशहरा है। बड़ा ही खुशी का दिन है। गंगा मां के दर्शन करने मात्र से ही जीवन का उद्धार हो जाता है। स्नान करने वाले को तो बड़ी ही पुण्य की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा है कि भागीरथ जी अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए धरती पर गंगा को लाना चाहते थे। क्योंकि एक श्राप के कारण केवल मां गंगा ही उनका उद्धार पर सकती थी। जिसके लिए उन्होंने मां गंगा की कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा ने दर्शन दिए और भागीरथ ने उनसे धरती पर आने की प्रार्थना की। फिर गंगा ने कहा “मैं धरती पर आने के लिए तैयार हूं , लेकिन मेरी तेज धारा धरती पर प्रलय ले आएगी। जिस पर भागीरथ ने उनसे इसका उपाय पूछा और गंगा ने शिव जी को इसका उपाय बताया। माना जाता है मां गंगा के प्रचंड वेग को नियंत्रित करने के लिए भगवान शिव ने उन्हें अपनी जटाओं में समा लिया जिससे धरती को प्रलय से बचाया जा सके। और उसके बाद नियंत्रित वेग से गंगा को पृथ्वी पर प्रवाहित करा। जिसके बाद भागीरथ ने अपने पूर्वजों की अस्थियां प्रवाहित कर उन्हें मुक्ति दिलाई।

– गंगा नदी का जल सालों तक प्रयोग करने और रखने पर भी खराब नहीं होता.
– गंगा जल के नियमित प्रयोग से रोग दूर होते हैं.
– हालांकि गंगा के इन गुणों के रहस्य से लोग बहुत हद तक अनजान हैं.
– कुछ लोग इसे चमत्कार कहते हैं, कुछ लोग इसे जड़ी बूटियों और आयुर्वेद से जोड़ते हैं.
– विज्ञान भी इसके दैवीय और चमत्कारी गुणों को स्वीकार करता है.
– अध्यात्म की दुनिया में इसे सकारात्मक उर्जा का चमत्कार कह सकते हैं।

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