हिमालय क्षेत्र हमारे लिए न केवल सांस्कृतिक दृष्टि से अति महत्वपूर्ण हैं, आईआईटी में हिमालय शिखर सम्मेलन का आयोजन

 

रुड़की ।      भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) रुड़की के डिजाइन इनोवेशन सेंटर (डीआइसी) की ओर से मंगलवार को हिमालय क्षेत्र में डिजाइन की चुनौतियों पर हिमालय शिखर सम्मेलन का आयोजन किया। इस अवसर पर हिमालय क्षेत्र में कार्यरत विभिन्न एनजीओ, वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों ने कार्यों को प्रस्तुत किया। साथ ही कार्य से संबंधित चुनौतियों को साझा किया। बायो टेक्नोलॉजी विभाग के सभागार में आयोजित सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में संस्थान के निदेशक प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी उपस्थित रहे। इस मौके पर निदेशक ने कहा कि हिमालय क्षेत्र हमारे लिए न केवल सांस्कृतिक दृष्टि से अति महत्वपूर्ण है, बल्कि हमारा मानना है कि उन विभिन्न चुनौतियों का समाधान निकालना हमारा कर्तव्य है, जिनका सामना इस क्षेत्र के लोगों को करना पड़ रहा है। इस शिखर सम्मेलन का आयोजन हमारे डिजाइन इनोवेशन सेंटर के माध्यम से इस प्रयास को आगे ले जाने के लिए किया गया है। उम्मीद है कि यह सम्मेलन डीआइसी के कार्य में एक नया आयाम जोड़ेगा। डीआइसी और उनके सहयोगी हिमालयी क्षेत्र की विभिन्न चुनौतियों पर विचार कर सकें, जहां डिजाइन पद्धति लागत प्रभावी और स्थाई समाधान प्रदान कर सकती है। भारत डिजाइन परिषद के पूर्व सदस्य सचिव प्रो. प्रद्युम्मन व्यास ने क्षेत्र में विभिन्न अवसरों के बारे में बताते हुए चुनौतियों का सामना करने के लिए स्थाई उपायों का विकास करने की जरुरत पर बल दिया। उन्होंने देश में पर्वतीय राज्यों के लिए अभिकल्प एवं विकास नीति के गठन को जरूरी बताया। वहीं, हिमालयन एन्वायरमेंटल स्टडीज एंड कंजर्वेशन आर्गेनाइजेशन के संस्थापक डॉ. अनिल जोशी ने हिमालय की रक्षा एवं सुरक्षा को बड़ी चुनौती बताया। कहा कि हिमालय के बारे में सिर्फ बंद कमरों में बैठकों में चर्चा नहीं होनी चाहिए, बल्कि हिमालय में बैठकर चर्चा होनी चाहिए। कहा कि खासतौर से जो लोग हिमालय की गोद में बैठे हैं, उनको हिमालय की चिता होनी चाहिए। उन्होंने आइआइटी रुड़की और अन्य संस्थानों को हिमालय की रक्षा एवं सुरक्षा में अपना योगदान देने का आह्वान किया। आइआइटी रुड़की के डीआइसी के संयोजक प्रो. अपूर्व कुमार शर्मा ने कहा कि डीआइसी हिमालय क्षेत्र से जुड़ी कई परियोजनाएं शुरू कर चुका है। साथ ही कुछ स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए कुछ उत्पादों का विकास किया गया है। इन उत्पादों में क्षेत्रों के लिए क्रॉप हार्वेस्टर, वन कूड़ा पदार्थों पर आधारित ग्रीन फर्नीचर का विकास, कम लागत के मैकेनिकल व्हील चेयर, हाइड्रो-डिसेक्शन उपकरण आदि शामिल हैं। इसके अलावा, डीआइसी उत्तराखंड के बुनकरों के लिए हाई यील्ड लूम डिजाइन के निर्माण पर भी कार्य कर रहा है। इस मौके पर प्रो. मनोरंजन परिदा, प्रो. इंद्रदीप सिंह, प्रो. रजत अग्रवाल, अन्य फैकल्टी और प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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