नवीन प्रौद्योगिकी विकसित कर देश के विकास में अपना योगदान देना, यही एक सच्चे अन्वेषक की पहचान इसी से विज्ञान और समाज का उत्थान निश्चित है

 

रुड़की ।    आतंकवाद विरोधी दिवस के अवसर पर मंगलवार को जिज्ञासा विद्यार्थी-वैज्ञानिक संयोजन कार्यक्रम के तहत केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान रुड़की के वैज्ञानिकों ने चिल्ड्रेंस सीनियर एकेडमी में जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किया। इस दौरान विद्यार्थियों को भारत की अहिसा और सहनशीलता की परंपरा पर विश्वास रखते हुए सभी प्रकार के आतंकवाद का डट कर विरोध करने, सभी वर्गों के बीच शांति, सामाजिक सद्भाव, सूझ-बूझ कायम करने और मानव जीवन मूल्यों को खतरा पहुंचाने वाली विघटनकारी शक्तियों से लड़ने की शपथ दिलाई गई। जिज्ञासा कार्यक्रम के संयोजक एवं संस्थान के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अतुल कुमार अग्रवाल ने आतंकवाद के विरुद्ध विज्ञान विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि जागरुकता और सतर्कता के साथ-साथ आतंकवाद को रोकने के लिए अनेक बचाव और प्रतिवाद उपायों की भी आवश्यकता है। इसमें युवाओं और विज्ञान-प्रौद्योगिकी की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने विद्यार्थियों को अनुसंधान कार्यों से ऐसी प्रौद्योगिकियां विकसित करने के लिए प्रेरित किया जिससे आतंकवादी गतिविधियों को रोका जा सके। उन्होंने कहा कि जनता की भलाई के लिए नवीन प्रौद्योगिकी विकसित कर देश के विकास में अपना योगदान देना, यही एक सच्चे अन्वेषक की पहचान है और इसी से विज्ञान और समाज का उत्थान निश्चित है। डॉ. अग्रवाल ने विद्यार्थियों को सीएसआइआर की 38 प्रयोगशालाओं में से एक सीएसआइआर-सीएसआइओ, चंडीगढ़ की ओर से विकसित आतंकवाद-रोधी तकनीक के विषय में बताया। यह एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) आधारित चेतावनी प्रणाली है। जिससे बॉर्डर सिक्योरिटी सुनिश्चित कर आतंकवादी गतिविधियों को रोका जा सकता है। इस मौके पर प्रधानाचार्य नीरज कुमार, शिक्षक और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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