पंचशील सिद्धान्त के प्रर्वतक और जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर महावीर अहिंसा के प्रमुख ध्वजवाहकों में से एक है,महावीर जयंती कठिन तपस्या से जीवन पर विजय प्राप्त करने का त्योहार है, रुड़की शहर विधायक प्रदीप बत्रा और समाजसेविका मनीषा बत्रा ने सभी को महावीर जयंती पर बधाई और शुभकामनाएं दी

 

रूड़की ।      शहर विधायक प्रदीप बत्रा और समाजसेवी का मनीषा बत्रा ने सभी को महावीर जयंती की बधाई और शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा है कि महावीर जयंती आज धूमधाम से मनाई जा रही है। भगवान महावीर के आत्म जागरण के संदेश में जीवन का सार छिपा हुआ है। उन्होंने इस बारे में लोगों के बीच में विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मावन को आत्म कल्याण के लिए आत्म जागरण के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए। इसके माध्यम से अपनी चैतन्यता को जागृत किया जा सकता है। इसी क्रम में उन्होंने जीवन में सत्य को विशेष महत्व प्रदान किया।भगवान महावीर ने अहिंसा, तप, संयम, पाच महाव्रत, पाच समिति, तीन गुप्ती, अनेकान्त, अपरिग्रह एवं आत्मवाद का संदेश दिया। उन्होंने जैन धर्म के अनुयायियों के लिए उन्होंने पांच व्रत दिए, जिसमें अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह को जीवन के लिए अनिवार्य बताया गया है। रुड़की शहर विधायक प्रदीप बत्रा और समाज सेविका मनीषा बत्रा ने कहा है कि जीवन में सत्य को प्रमुखता देनी चाहिए। बुद्धिमान मनुष्य सत्य की छाया में रहता है और यही कारण है कि वह हर बंधन से मुक्त रहता है। सत्य दुनिया में सबसे शक्तिशाली है। एक अच्छे इंसान को कभी सच का साथ नहीं छोड़ना चाहिए। मानव को बेहतर इंसान बनने की कोशिश करनी चाहिए और इसके लिए जरूरी है कि वह सत्य की शरण में रहे। सत्य का मतलब उचित या अनुचित में से उचित के चुनाव से है। सत्य में हमारे मन व बुद्धि को शुद्ध करने की शक्ति होती है। इसलिए इसका अनुसरण करना चाहिए।दूसरों के प्रति हिंसा का भाव न दिखाना ही अहिंसा है। जैसा हम खुद के विषय में सोचते हैं और वैसा ही दूसरों के बारे में भी सोचना चाहिए। अहिंसा को परिभाषित करते हुए भगवान महावीर ने कहा कि अहिंसा परमो धर्म:। इसके तहत हमारी कोशिश होनी चाहिए कि जाने अनजाने में हानि न पहुंचाएं। मानव मात्र के पास ही किसी को कष्ट से बचाने की अद्भुत शक्ति है। इसका उपयोग करते हुए हमें अहिंसा के पथ पर चलना चाहिए।

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