चकबंदी अधिकारियों पर गिरफ्तारी की तलवार लटकी, एसआईटी जांच में भूमि खुर्द खुर्द का मामला आया है सामने, किसान संगठनों ने कार्रवाई के लिए बनाया दबाव

 

रुड़की ।    एसआईटी जांच में सामने आए भूमि खुर्द खुर्द के मामले में नामजद किए गए अधिकारियों पर जल्द कार्रवाई के लिए किसान संगठनों का दबाव बढ़ता जा रहा है। जिसके चलते हैं संबंधित चकबंदी अधिकारियों पर गिरफ्तारी की तलवार लटकती नजर आ रही। माना जा रहा है कि इसीलिए आरोपी चकबंदी अधिकारी अपने बचाव के रास्ते तलाश रहे हैं और गिरफ्तारी पर स्टे के लिए नैनीताल हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं। बता दें कि पिछले सप्ताह एसआईटी की जांच में चकबंदी अधिकारियों और भूमाफिया के बीच गठजोड़ उजागर हुआ है जिसके चलते संबंधित अधिकारियों और भू माफिया के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। मुकदमा धोखाधड़ी जालसाजी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने की धाराओं में दर्ज हुआ है। एसआईटी की जांच भाजपा नेता जगजीवन राम की शिकायत पर हुई है। रुड़की तहसील क्षेत्र के फिरोजपुर रख बे से जुड़े जुड़े इस मामले की रिपोर्ट बहादराबाद थाने में दर्ज हुई है। मुकदमा एसआईटी की जांच के बाद एसपी सिटी के आदेश पर 22 लोगों के खिलाफ पंजीकृत हुआ है । मुकदमे की विवेचना एसएसआई अशोक रावत को सौंप दी गई है। बता दे है कि भाजपा नेता जगजीवन राम चकबंदी अधिकारियों पर किसानों की भूमि को खुर्द बुर्द करने और भूमाफियाओं से मिलीभगत की जांच की मांग कर रहे हैं। उनके द्वारा इस संबंध में कोर्ट में भी याचिका दायर की गई। जिसमें कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पिछले दिनों एसआईटी का गठन कर पूरे मामले की जांच करने के आदेश दिए थे इस पर एसआईटी का गठन हुआ और फिरोजपुर के रख दे में हुई गड़बड़ी की जांच हुई जिसके चलते पाया गया है कि यह केक बनाने के कई कई दाखिल खारिज कर दिए गए हैं । रेस्टोरेशन के बहाने बेशकीमती भूमि माफिया के नाम दर्ज कर दी गई है। दस्तावेजों में और भी कई गड़बड़ियां की गई है । रास्तों की भूमि भी भू माफियाओं को दे दी गई है। दोयम दर्जे की भूमि की अधिक कीमत लगाकर और सरकार की भूमि की कम कीमत लगाकर वह भूमाफिया को दे दी गई। जिसमें बंदोबस्त अधिकारी दीवान सिंह नेगी,चकबंदी अधिकारी टीकम सिंह चौहान,अनिल कुमार,सुनील, धर्मेंद्र कुमार,,सदन लाल,मुकेश कुमार पुंडीर,जयवीर,अनिल सिंघल,प्रदीप गर्ग,लेखपाल संदीप सैनी, सचिन कुमार पुत्र महेंद्र सिंह,धर्मवीर पुत्र राजेन्द्र,जयपाल पुत्र तुगल,दीपक पुत्र राजेन्द्र,अनुज,दीपक पुत्रगण राजपाल निवासी बेलड़ा के अलावा श्रीमती श्वेता मित्तल पत्नी विकास मित्तल,विकास मित्तल पुत्र ज्ञान चंद मित्तल निवासी रुड़की और अशोक कुमार पुत्र करतार सिंह निवासी बूड़पुर,रूमा देवी पत्नी अशोक कुमार,सुशील कुमार पुत्र समय सिंह के खिलाफमुकदमा दर्ज किया है। जगजीवन का आरोप है की चकबंदी अधिकारियों ने फर्जी तरीके से भूमाफिया से मिलकर किसानों की भूमि को खुर्द बुर्द करने का काम किया है । जो जांच में सामने आ चुका है । उनका कहना है कि कई चकबंदी अधिकारी कंफर्म भी नहीं है। सहायक चकबंदी अधिकारी होते ही वह चकबंदी अधिकारी की कोर्ट कर रहे हैं जो कि नियमानुसार गलत है । चकबंदी अधिकारियों ने एनएच 58 की भूमि पर किसानों का मुआवजा भी भूमाफियाओ और चकबंदी अधिकारियों की जेब मे गया है। यदि इस ओर जांच हो तो यह भी बड़ा है एनएच मुआवजा घोटाला है।। इतना ही नहीं आज के समय मे सबसे अधिक संपत्ति चकबंदी अधिकारियों उनके रिश्तेदारों और लेखपालों के पास है। त्रिवेंद्र सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत यह कार्रवाई हो रही है । मामला हरीश रावत सरकार में भी उठाया गया। लेकिन उस समय भू माफिया और अधिकारियों की सांठगांठ के चलते कार्रवाई नहीं हो सकी। मुकदमा दर्ज होने के साथ ही चकबंदी अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है। कई अधिकारी तो आज कचहरी भी नहीं पहुंचे हैं। जिस कारण फरियादियों को परेशानी हो रही है। बता दें कि चकबंदी अधिकारी और भूमाफिया के बीच लंबे समय से गठजोड़ चला रहा है। यदि इमली खेड़ा ,खेड़ीशिकोहपुर ,इब्राहिमपुर मशाई भगवानपुर टोडा कल्याणपुर,बेलड़ा आदि क्षेत्रों की छानबीन की जाए तो यहां पर भी चकबंदी अधिकारियों की कारगुजारी उजागर होगी। इतना ही नहीं टोडा कल्याणपुर जैसे गांव में तो चकबंदी अधिकारियों ने सरकारी भूमि खुर्द बंद कर दी मौके पर सैकड़ों बीघे बचत भूमि होनी चाहिए लेकिन कहीं नजर नहीं आ रही है। किसान संगठन इस मामले को लेकर बेहद नाराज है और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ गिरफ्तारी की कार्रवाई से पहले पीछे हटने को तैयार नहीं है। किसान नेता चौधरी कटार सिंह ,राकेश आदि का कहना है कि भूमि खुर्द खुर्द करने वाले अधिकारियों पर जल्द से जल्द कार्रवाई होनी चाहिए। इस संबंध में किसान नेताओं ने मुख्यमंत्री मुख्य मुख्य सलाहकार प्रोफेसर नरेंद्र सिंह से भी बात की और उन्हें चकबंदी अधिकारियों की कार्यशैली से अवगत कराया।

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