रमजान का महीना तमाम इंसानों के दुख-दर्द और भूख-प्यास को समझने का महीना, राज्य अन्य पिछड़ा आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष एडवोकेट शमीम अहमद ने कहा कि खुद को खुदा की राह में समर्पित कर देने का प्रतीक पाक महीना माह-ए-रमजान न सिर्फ रहमतों और बरकतों की बारिश का वक्फा

 

रुड़की ।      राज्य अन्य पिछड़ा आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष एडवोकेट शमीम अहमद ने कहा है कि खुद को खुदा की राह में समर्पित कर देने का प्रतीक पाक महीना माह-ए-रमजान न सिर्फ रहमतों और बरकतों की बारिश का वक्फा है। बल्कि समूची मानव जाति को प्रेम, भाईचारे और इंसानियत का संदेश भी देता है। मौजूदा हालात में रमजान का संदेश और भी प्रासंगिक हो गया है। इस पाक महीने में अल्लाह अपने बंदों पर रहमतों का खजाना लुटाता है। भूखे-प्यासे रहकर खुदा की इबादत करने वालों के गुनाह माफ हो जाते हैं। इस माह में दोजख (नरक) के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं और जन्नत की राह खुल जाती है। रमजान के पाक मौके पर रूड़की क्षेत्र की सभी मस्जिदों में इबादत का दौर चल रहा है। इस्लाम के अनुयायी रोजे रखकर प्रतिदिन तकरीरों को सुन रहे हैं। नमाजों का दौर भी जारी है। रोजाना हो रही तकरीरों मैं बंदों को नेक बनने की सलाह दी जा रही है। राज्य अन्य पिछड़ा आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष एडवोकेट शमीम अहमद ने कहा है कि रोजा अच्छी जिंदगी जीने का प्रशिक्षण है जिसमें इबादत कर खुदा की राह पर चलने वाले इंसान का जमीर रोजेदार को एक नेक इंसान के व्यक्तित्व के लिए जरूरी हर बात की तरबियत देता है। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया की कहानी भूख, प्यास और इंसानी ख्वाहिशों के गिर्द घूमती है और रोजा इन तीनों चीजों पर नियंत्रण रखने की साधना है। रमजान का महीना तमाम इंसानों के दुख-दर्द और भूख-प्यास को समझने का महीना है ताकि रोजेदारों में भले-बुरे को समझने की सलाहियत पैदा हो। एडवोकेट शमीम अहमद ने कहा कि बुराई से घिरी इस दुनिया में रमजान का संदेश और भी प्रासंगिक हो गया है। हर तरफ झूठ, मक्कारी और यौनाचार का बोलबाला हो चुका है। ऐसे में मानव जाति को संयम व आत्मनियंत्रण का संदेश देने वाले रोजे का महत्व और भी बढ़ गया है। उन्होंने रमजान के महत्व के बारे में कहा कि अमूमन साल में 11 महीने तक इंसान दुनियादारी के झंझावातों में फंसा रहता है, लिहाजा अल्लाह ने रमजान का महीना आदर्श जीवनशैली के लिए तय किया है। रमजान का उद्देश्य साधन सम्पन्न लोगों को भी भूख-प्यास का एहसास कराकर पूरी कौम को अल्लाह के करीब लाकर नेक राह पर डालना है।

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