यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ सबसे पवित्र स्थान हैं, यह वही स्थल है जहां पृथ्वी और स्वर्ग एकाकार होते हैं, रुड़की शहर विधायक प्रदीप बत्रा ने दुनिया भर के श्रद्धालुओं को देवभूमि उत्तराखंड की चारधाम यात्रा के लिए आमंत्रित किया

 

रुड़की ।      रुड़की शहर विधायक प्रदीप बत्रा ने दुनिया भर के श्रद्धालुओं को चार धाम यात्रा के लिए आमंत्रित किया है उन्होंने कहा है कि भारतीय सभ्यता और संस्कृति में ‘गीता’ और ‘गंगा’ का सर्वोच्च स्थान है। गंगा एक ओर जहाँ तन के मैल से मुक्ति प्रदान करती है, वहीँ दूसरी ओर गीता मन के मैल को निस्फूर करती है। गंगा का सम्बन्ध जहाँ भगवान शिव से है, वहीँ गीता श्री कृष्ण के मुखारविंद से झरा ऐसा अमृत प्रसाद है; जिसे सदियों से प्राप्तकर मानवता स्वयं को धन्य और उपकृत अनुभव करती रही है। यमुना श्री कृष्ण के अंग-संग चली है, तो गंगा सदाशिव की जटाओं में उलझी जीवन के मुक्ति पथ को सुलझाने में व्यस्त है। इन समस्त मूल्यों का निकटतम अनुभव ही चार धाम की यात्रा है। एक ऐसी यात्रा जहाँ भारतीयता के गौरव कलश आकाश को छूते हैं ; जहाँ की प्राकृतिक वादियों में जीवन के संताप से उत्तप्त मन चिर विश्राम का साक्षी बनता है। यमुनोत्री-गंगोत्री,केदारनाथ और बद्रीनाथ हिमवादियों में मानवीय प्रेम और श्रद्धा के प्रदीप्त शिखर हैं; जहाँ से शांति और धर्म के नित नए झरने उदित होते हैं।जहाँ आशा और विश्वास के नए पुष्प उमगते हैं। गहरी मान्यताओं में तीर्थ यात्रा और धर्म-कर्म का प्राधान्य रहा है। सनातन परंपरा में चार पुरुषार्थों को सर्वोच्च मान्यता प्रदान की गयी है -धर्म,अर्थ ,काम और मोक्ष। चार धाम की यात्रा इन्हीं चारों पुरुषार्थों की परिक्रमा है। प्रत्येक हिन्दू की यह इच्छा रहती है कि वह अपने जीवन काल में कम से कम एक बार अवश्य चार धाम की यात्रा का सुख भोगे। रुड़की शहर विधायक प्रदीप बत्रा देखा है कि चार धाम की यात्रा एक ऐसी यात्रा है, जो आपको पुण्य लाभ तो देती ही है, साथ ही इसमें आपको एक रोमांच भी मिलता है और आप कुदरत के कई अद्भुत नजारों से भी रूबरू होते हैं। यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ की यात्रा को चार धाम की यात्रा ही माना जाता है, इसलिए आप सभी चार धाम यात्रा जरूर करें।

अगर आप दिल्ली से अपनी चार धाम यात्रा शुरू करते हैं तो आपको कुल 1607 किमी की यात्रा करनी पड़ती है. दिल्ली से सबसे पहले आपको हरिद्वार पहुँचना होता है जहाँ से यात्रा शुरू होती है। यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ होते हुए बद्रीनाथ और अंत में ऋषिकेश में यात्रा समाप्त होती है।

दिल्ली से हरिद्वार – 210 किमी

हरिद्वार से बरकोट – 220 किमी

बरकोट से यमूणोतरी – 36 किमी

बारकोट से उत्तरकाशी – 100 किमी

उत्तरकाशी से गंगोत्री – 100 किमी

उत्तरकाशी से रुद्रप्रयाग – 180 किमी

रुद्रप्रयाग से केदारनाथ – 74 किमी

रुद्रप्रयाग से बद्रीनाथ – 160 किमी

बद्रीनाथ से ऋषिकेश – 297 किमी

ऋषिकेश से दिल्ली – 230 किमी

चार धाम यात्रा में केदारनाथ और बद्रीनाथ के अलावा आप बहुत से मंदिरों के दर्शन कर सकते हैं जिनमें प्रमुख हैं भविष्यबद्री मंदिर, नृसिंह मंदिर, बासुदेव मंदिर, जोशीमठ, विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी, मदमहेश्वर मंदिर, महाकाली मंदिर कालीमठ, नारायण मंदिर, तुंगनाथ मंदिर आदि. छर्धम यात्रा में इसके अलावा 5 प्रयागों के भी दर्शन करने को मिलते हैं जिनमें रूद्रप्रयाग, देवप्रयाग केदार मार्ग पर और कर्णप्रयाग, नंदप्रयाग और विष्णुप्रयाग बद्रीनाथ मार्ग पर पड़ते हैं।

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