मनुष्य अपने कर्मो के बंधन से दुखी रहता है, विशद सागर महाराज के सानिध्य में चातुर्मास कलश स्थापना कर कार्यक्रम का शुभारंभ

 

हरिद्वार ।      श्री दिगम्बर जैन मंदिर हरिद्वार के तत्वाधान में वेदा वेदा ग्रीन में आचार्य विशद सागर महाराज के सानिध्य में चातुर्मास कलश स्थापना कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। जैन समाज के महिलाओं व बच्चों ने स्वागत गीत व सास्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर अतिथियों का अभिनंदन किया। इस अवसर पर आचार्य विशद सागर महाराज, मुनि विशाल सागर, आर्थिका भक्ति भारती वात्सल्य और भारती माता ससंघ का जैन समाज के पदाधिकारियों व विभिन्न क्षेत्रों से आये श्रद्धालुओं ने स्वागत कर आशर्वाद प्राप्त किया । इस अवसर पर आचार्य विशद सागर महाराज श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि साधु-संतों एवं साध्वियों का चातुर्मास का मिलना बड़ा ही भाग्यपूर्ण होता है, जिसमें साधु-संत एक जगह रह कर भक्ति की लहर प्रवाहित करते हैं। उन्होंने कहा कि अपनी शक्ति के अनुसार त्याग, तप, तपस्या व स्वाध्याय किया जाना चाहिए। मनुष्य अपने कर्मो के बंधन से दुखी रहता है, यदि वह अपने कर्मो को मुक्त कर दे तो वह सुखी हो सकता है। उन्होंने कहा कि श्रावक के जीवन में संयम नियंत्रित रूप से मर्यादित रहना चाहिए। उन्होंने इस मर्यादा को विस्तार से समझाते हुए कहा कि मर्यादा को तीन प्रकार से अपने जीवन में ग्रहण कर सकते हैं। पहला खानपान, जिसमें सब्जिया, खाद्य सामग्री एवं आटा-दाल आदि को सीमित मात्रा में प्रयोग करे। इसके लिये एक निश्चित मात्रा में 10-15 प्रकार की सब्जिया व खाद्य सामग्री को प्रयोग किये जाने का संकल्प किया जाना चाहिए। व्यवहारिक रूप में नहाने के लिए एक बाल्टी से अधिक जल का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। इसी प्रकार पूरे दिन में पहनने के वस्त्रों का प्रयोग, आने-जाने की दूरी की सीमा को भी निश्चित किया जाना चाहिए। कार्यक्रम के दौरान साधु सेवा समिति के अध्यक्ष बालेश चंद जैन, मंत्री विजय कुमार जैन, कोषाध्यक्ष गिरीश कुमार जैन, संदीप जैन, सतीश जैन, नितेश जैन, अशोक जैन, रवि जैन, राकेश जैन,  सहित सेंकडो लोग मौजूद रहे ।

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